हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1 (Haryana Famous Top Fair)

प्रिय पाठकों, Help2Youth के माध्यम से आज हम लेकर आए है हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1 जिससे आप आने वाले HSSC, SSC, Bank Jobs आदि अनेक प्रकार की प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर सकते है यहाँ आपको हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1 जिले अनुसार देखने को मिलेंगे यदि फिर भी कोई मेला रह जाता है तो  हमारे साथ कॉमेंट बॉक्स मे सांझा कर सकते है हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-2

हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

भारत देश मे हरियाणा की संस्कृति की एक अलग ही पहचान है। यहां की संस्कृति पूरे देश मे फैली हुई है। हरियाणा के प्रसिद्व मेले, त्यौहार, नृत्य आदि समय समय पर हर वर्ग के लोग अपनी अपनी इच्छानुसार बड़ी धूमधाम से मनाते है।

हरियाणा लोग अपनी संस्कृति व कलानुसार सारे पर्व एक साथ मिलकर मनाते है, हरियाणा के जिले कुरुक्षेत्र (जो श्रीमद्भागवत गीता की जन्मभूमि है) में सूर्यग्रहण का बहुत बड़ा मेला लगता है, इस मेले को देखने के किये दुनिया के कोने कोने से लोग आते है और उन मेलों का लुफ्त उठाते है।हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

कुछ मेले ऐसे है जो पूरे हरियाणा प्रदेश मे लगाए जाते है जैसे तीज का मेला, जनमाष्टमी का मेला, दशहरा का मेला, रक्षाबंधन का मेला व गोगापीर का मेला आदि जो पूरे जिले मे लगाए जाते है लेकिन फिर भी हम आपको हरियाण के प्रसिद्व मेले भाग-1 मे जिलानुसार बताने जा रहे है जिसका विवरण निम्न प्रकार से दिया हुआ है। बाकी जिलों के मेले आप हरियाणा के प्रसिद्व मेले भाग-2 देख सकते है

हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-2 

पंचकूला जिले के मेले

मेंगो मेला

यह मेला पिंजौर गार्डन में लगता है इसे फिदाई खां कोका ने बनवाया था, ये बहुत बड़े मुगल दरबार के बादशाह थे और औरेंगजेब के चेचरे भाई थे। इसे पिंजौर गार्डन, याज्ञवेन्द्र गार्डन भी कहते है। इसे हरियाणा का मुगल गार्डन भी कहा जाता है यह जुलाई के पहले सप्ताह में लगता है

बैशाखी मेला

यह अप्रैल के महीने में लगाया जाता है

हेरीटेज मेला

यह दिसम्बर के महीने में लगाया जाता है, और यह मेला एक फ़ेस्टिवल के रूप में आयोजित किया जाता है, यह मेला पंचकूला के पिंजौर गार्डन में लगाया जाता है और यह भी हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1 मे से एक है। हिमाचल प्रदेश से काफी श्रद्धालु इस मेले का लुफ्त उठाते है, क्योकि इस मेले में हरियाणा की संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है

काली माई का मेला

यह मेला कालका में लगाया जाता है यह काली माता के नाम से प्रसिद्व है इस मेले में लाखों श्रद्धालु हर साल दर्शन करने आते है और यह चैत्र शुक्लपक्ष चतुर्थी को आयोजित किया जाता है ऐसा माना जाता है की इस मंदिर में लोग शराब चढ़ाना शुभ मानते है।

फरीदाबाद जिले के मेले

बाबा उदास नाथ का मेला

यह मेला अलावलपुर गांव में लगाया जाता है ऐसा माना जाता है बाबा उदासपुर आने से पहले कुरारा गांव गए थे जहां उन्हें समाधि के लिए जगह मांगी थी लेकिन वहाँ के लोगों ने कहा कि हमे यहाँ बस्तियां बसानी है उस समय वहां 9 ही घर थे।

बाबा ने कहा कि यहां 9 ही घर रहंगे और उनकी वाणी सत्य साबित हुई उसके बाद ये अलावलपुर गाँव मे आये, वहां के लोगों ने इन्हें समाधि बनाने के लिए जगह दी तब से वहां ये मेला लगाया जाता है और इसे बनी वाला मन्दिर भी कहते है

फुलडोर का मेला

यह मेला अटरचट्टा में चैत्र कृष्ण पक्ष की दिवतीय को लगाया जाता है

दादा कान्हा रावत का मेला

मुगल सम्राट औरेंगजेब  के खिलाफ बिगुल बजाने वाली वीर कान्हा रावत  1682 ईस्वी म शहीद हुए का नाम आज भी याद किया जाता है व इतिहास के सुनहरो पन्नो में लिखा जाता है उनके पैतृक गाँव बहीन में यह मेला लगाया जाता है।

औरेंगजेब ने इनको जिंदा गढ़वा दिया था और उसी स्थान पर एक गौशाला बनी थी जहां पर ये मेला का आयोजन हर साल शहीदी दिवस पर  किया जाता है ताकि युवा पीढ़ी इनके जीवन से प्रेरणा ले सके।

कार्तिक अमावस्या का मेला

यह मेला फरीदाबाद जिले के वल्लभगढ़ में लगाया जाता है इस मेले का उद्देश्य वल्लभगढ़ के राजा नाहर सिंह के महल को पर्यटन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना है , यह मेला नवंबर महीने का आस पास मनाया जाता है हरियाणा के पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किया गया है इस मेले का उद्घाटन एक बार भारत के उपराष्ट्रपति श्री कृष्णकांत ने किया था

कनुवा का मेला

यह मेला गाठोता में भादो कृष्ण पक्ष की एकदशी के दिन लगाया जाता है

बलदेव छठ का मेला

यह मेला फरीदाबाद जिले के वल्लभगढ़ में लगाया जाता है यह मेला भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम व बलदाऊ के जन्म अवसर पर बड़े धूमधाम से मनाया जाता है यह मेला अगस्त व सितम्बर माह म लगाया जाता है इस मेले में बच्चों वे लिये मनोरंजन, झूले, व्यंजनों की पूरी व्यवस्था की जाती है

कालका का मेला

यह मेला फरीदाबाद जिले के वल्लभगढ़ से लगभग 22 किलोमीटर दूर मोहना गाँव के जंगलों में लगाया जाता है यह बहुत पुराना मन्दिर है ऐसा माना जाता है कि जब पांडव जब यहा से गुजर रहे थे तो उन्होंने इस मंदिर में विजयी होने का आशीर्वाद मांगा था, यहाँ पर दिल्ली, उत्तरप्रदेश आदि राज्य से लोग दर्शन करने आते है, इसे काली माता का मंदिर भी कहते है

यह हरियाणा के प्रसिद्व मेले भाग-1 मे से एक है खासतौर पर यहां नवरात्रों के दिन यहां बहुत बड़ा मेला लगता है व हर महीने की अष्टमी व सप्तमी  को भक्तो व श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है, इसे मोहनगढ़ वाली काली माता के नाम से भी जाना जाता है इसकी मूर्ति अष्ट धातु की बनी हुई है

जन्माष्टमी का मेला

यह मेला फरीदाबाद जिले के धतीर गाँव मे अष्टमी को लगाया जाता है, भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन पर ये मेला आयोजित किया जाता है और इस दिन झांकियां भी निकाली जाती है

गोगापीर का मेला

यह मेला बहबलपुर में लगाया जाता है और यह नवमी के दिन लगता है इस मेले वाले दिन या मेले से एक दिन पहले महिलाएं आने घरों में गोगामेड़ी या गोगापीर की पूजा करती है

शिव चौदस का मेला

यह मेला फरीदाबाद के रामगंगा के किनारे बसे मटौली में आयोजित किया जाता है इस मेले में भगवान शिव की आराधना के लिये हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों से लाखों श्रद्धालु आते है ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन शिवजी की भक्त महादेव की पूजा करते है और उनकी इच्छा पूरी करते है और महाशिवरात्रि व चौदस के दिन यहां चेघड़ चढ़ाई जाती है। हरियाणा के प्रसिद्ध मेले

सूरजकुण्ड का मेला

यह मेला फरीदाबाद जिले के सूरजकुण्ड के लगाया जाता है, यह मेला हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1 में से एक है यह वर्ष 1987 के शुरू किया गया था इस मेले का आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जाता है यह अपने हस्तशिल्प मेले के लिए प्रसिद्ध है इस शिल्प मेले में अपने आप एक हथकरघा व देश के सभी हस्तशिल्प व हर प्रकार की हाथ से बनी हुई आकृतिया, व्यंजन व मिट्टी के बर्तन आदि वस्तुओं का प्रयोग करके इस मेले की शोभा बढ़ाते है।

Surajkund Mela

इस मेले के लगभग 15 से 20 देश  शामिल होते है और इस मेले में लुफ्त उठाते है, यह मेला हर साल 1 फरवरी से 15 फरवरी तक लगाया जाता है और इस मेले में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकार शामिल होते है व अपनी प्रस्तुति पेश करते है।

यह मेला पूरे भारत देश मे प्रसिद्ध है क्योंकि इस मेले में हरियाणा को नही बल्कि पूरे भारत देश की संस्कृति की झलक दिखाई देती है इस मेले का उद्घाटन व समापन देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री या अन्य कोई बड़ी हस्ती द्वारा किया जाता है। सूरजकुण्ड मेला हरियाण के प्रसिद्ध मेले में से एक है।

रक्षाबंधन का मेला

यह मेला पलवल जिले के पंचवटी में लगाया जाता है ऐसा माना जाता है कि यह पांडवो से पहले का मंदिर है और अज्ञातवास के दौरान कुछ दिन पाण्डव इस मंदिर के ठहरे थे।बाबा त्रिखा राम दस जे घोर तपस्या की थी। इसे पंचवटी मंदिर भी कहा जाता है। सावन के सोमवार को शिव जी श्रृंगार किया जाता है।हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

भिवानी जिले के मेले

दशहरा का मेला

यह मेला पूरे भारत वर्ष में प्रसिद्ध है और हरियाणा के प्रसिद्व मेले में एक है यह लगभग पूरे हरियाणा में धूमधाम से मनाया जाता है इसके साथ यह लोहारू, दादरी में विजय दशमी के दिन लगाया जाता है और इस दिन राम और रावण की झांकियों ननिकाली जाती है और श्री रामचन्द्र जी रावण पर बुराई की अच्छाई की जीत के साथ खुशियां मनाते है।

नागा बाबा का मेला

यह भिवानी जिले के नवारागढ़ गाँवके लगाया जाता है और श्री नागा बाबा की पूजा की जाती है ग्राम पंचायत व श्री नागा बाबा जनकल्याण समिति द्वारा इस मेले का आयोजन किया जाता है।हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

पूर्णमासी का मेला

यह मेला तोशाम में लगाया जाता है हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

बाबा खेड़े वाला का मेला

यह मेला भिवानी जिले के बमल गाँव के पास नौरंगाबाद में लगाया जाता है या मेला खासतौर पर रक्षाबंधन के दिन लगाया जाता है, इन मेले के कई लोग बाबा खेड़ेवाला की पूजा करते है, इस मेले के नजदीक बाबा धर्म नाथ का मंदिर भी है

मुंगीपा का मेलाMungipa Mandir

यह मेला भिवानी जिले के रिवासा में लगाया जाता है यह मेला साल में दो बार लगाया जाता है यह तोशाम की पहाड़ी के मध्य में स्थित है इस मंदिर में बाबा मुंगीपा की समाधि बनी है है हर मंगलवार को यहाँ हजारो की संख्या में लोग दर्शन करने आते है यह भी हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1 में एक है। हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

इस पहाड़ी पर आठ कुंड बने है जिसे पांडु तीर्थ के नाम से जाना जाता है और 13 दिन पांडवों ने बाबा मुंगीपा के मंदिर में व्यतीत किए थे, ऐसा माना जाता है यहां एक शिवलिंग है जो अपने आप उभर कर आया था। इस पहाड़ी के पास बने 2 बड़े चिह्न है जिसे भीम के गोड़े कहा जाता है।

सती का मेला

यह मेला भिवानी के गांव खरक कलां में लगाया जाता है यह दादी सती जाबदे की एडम लगाया जाता है इस मेले में भारी संख्या में लोग दादी सती की पूजा करके मन्नत मांगते है हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1 प्रसिद्ध मेले

गुरग्राम जिले के मेले

शीतला माता का मेला

यह मेला भी हरियाणा के प्रसिद्व मेले में एक है यह गुरग्राम में लगाया जाता है यह मेला लगभग 3 महीने तक चलता है यह भी हरियाणा के प्रसिद्ध मेले मे से एक है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु दूर दराज से आते है और मंदिर में सच्ची श्रद्धा से कुछ मांगते है तो माता उन्हें कभी निराश नहीं करती।

नवरात्रों के 9 दिन भारी भीड़ देखने को मिलती है क्योंकि शीतला माता को 9 दुर्गों में सप्तकाल रात्रि माता के रूप में मनाया जाता है कुछ भक्तों का कहना है कि यह गुरुद्रोण कि पत्नी व कृपयाचार्य की बहन है तालाब में खुदाई के दौरान माता शीतला की मूर्ति प्रकट हुई थी।

बुधो माता का मेला

यह मेला गुरग्राम के फरूखनगर के मुबारिकपुर गाँव मे लगाया जाता है, इस मंदिर में पूजा अर्चना करने की परंपरा है यह मार्च महीने में लगाया जाता है इस मेले में उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली ज़ हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों से श्रद्धालु आते है।

गोगा नवमी के मेला

यह मेला भादो मास की नवमी को इस्लामपुर में लगाया जाता है उस मेले में गोगपीर की पूजा की जाती है यह भी हरियाणा के प्रसिद्ध मेले मे से एक है।

महादेव का मेला

यह मेला गुरग्राम के इच्छापुरी में लगाया जाता है, सभी श्रद्धालुओं की इच्छा पूरी होने के कारण इस मंदिर का नाम इच्छापुरी पड़ा, क्योंकि यहां शिवलिंग खुद प्रकट हुए थे और यह मेला साल में दो बार लगाया जाता है इस मंदिर के लाखों श्रद्धालु व कावड़िये हरिद्वार से गंगाजल लाकर शिवरात्रि के दिन महादेव को कावड़ चढ़ाते है

बूढ़ी तीज का मेला

यह आलदोका गाँव मे लगाया जाता है इस दिन बड़े दंगल का आयोजन किया जाता है और बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले व खाने पीने की स्टॉल लगाई जाती है यह मेला मुस्लिम समुदाय द्वारा लगाया जाता है।

भक्त पूरणमल का मेला

यह मेला मानेसर के नज़दीक कासन गाँव मे लगाया जाता है यह सितम्बर के महीने (भादो माह) में लगाया जाता है इस दिन बाबा बिसह भगत पूरणमल की पूजा करते है और यह मेला 3 से 4 दिन तक चलता है और लाखो की भीड़ जमा होती है

शाह चोखा खोरी का मेला

यह मेला खोरी नामक स्थान पर लगाया जाता है और यह गर्मियों के मौसम अपैल मई में लगाया जाता है और यह मेला भी मुस्लिम समाज के द्वारा लगाया जाता है इस मस्जिद के पास मक्का मस्जिद भी है।

शिवजी का मेला

यह मेला गुरुग्राम के पुन्हाना गाँव मे फरवरी महीने में लगाया जाता है।

अम्बाला जिले के मेले

तीज का मेला

यह मेला अंबाला के पँजाखेड़ा साहिब नामक स्थान पर लगाया जाता है और यह जिले का सबसे पुराना तीज का मेला है यह मेला खासतौर पर पुरुषों द्वारा मनाया जाता है जहां महिलाओं भी आ सकती है पूरे विश्व के दो ही जगहों पर तीज का मेला पुरषों द्वारा मनाया जाता है एक पंजाब और अम्बाला में लगाया जााता हैै

वामन द्वादशी का मेला

यह मेला काफी पुराना है भगवान विष्णु के वामन रूप का मंदिर अकेले कानपुर में है लेकिन अम्बाला में नौरंगराय तालाब व बड़ा ठाकुरद्वारा में वामन अतवार की मूर्ति लगी है और यह भादो मास की द्वादशी के दिन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है

शारदा देवी का मेला

यह मेला नो गजा पीर बाबा की सेवादार शारदा देवी की याद में मनाया जाता है और यह अम्बाला जिले के त्रिलोकपुर में मनाया जाता है

अम्बिका देवी का मेला

अम्बाला शहर के बीचों बीच अम्बिका देवी का मंदिर है जो 300 साल पुराना है और कहा जाता है कि इस मंदिर के अम्बिका देवी प्रकट हुई थी जिसकी वहज से इस शहर का नाम अम्बिका पड़ा था इस मंदिर में पूजा अर्चना करने से सारे कष्ट दूर होते है और मंदिर में बाहर बहुत बड़ा मेला लगता है

गोगा नवमी के मेला

अंबाला के केसरी नामक जगह पर येह मेला भादो माह में लगाया जाता है

हिसार जिले के मेले

नवरात्रि का मेला

यह हिसार जिले के बनभौरी मन्दिर में लगाया जाता है षष्ठी से अष्टमी तक यह लाखो श्रद्धालु आते है और मेले में चुनी, आभूषण, कंबल आदि मन्दिर म चढ़ाते है।

जन्माष्टमी का मेला

यह मेला पूरे हरियाणा के प्रसिद्ध मेले में से एक है यह अधिकतर हर जिले में मनाया जाता है गुरु जम्बेश्वर व श्रीकृष्ण के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है

गोगा नवमी के मेला

यह हरियाणा के सभी जिलों में मनाया जाता है और हिसार जिले में शुक्ल पक्ष को मनाया जाता है और लाखो श्रद्धालु इस मेले में गोगाजी की समाधि पर माथा टेकते हैहरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

शिवजी का मेला

यह मेला आदमपुर से 10 किमी दूर सीसवाल मे लगाया जाता है और इसके साथ यह किरमारा में भी लगाया जता है

काली देवी का मेला

यह हिसार जिले के हांसी में लगाया जाता है और इस मेले में काली देवी की पूजा की जाती हैहरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

अग्रसेन जयंती के मेला

महाराजा अग्रसेन की याद में यह मेला अग्रोहा नामक स्थान पर लगाया जाता है और हिसार और फतेहाबाद से काफी श्रद्धालु इस मेले मे आते है यह छोटा पिकनिक स्थल भी है यह पर हजारों की संख्या में लोग पिकनिक मनाने आते है और एक गुफा भी है जिसके साथ यहां बजरंग बली हनुमान की बहुत बड़ी पत्थर की मूर्ति बनाई हुई है हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

युमनानगर जिले के मेले

गोपाल मोचन मेला

यह यमुनानगर के ऐतिहासिक तीर्थ स्थल बिलासपुर में हर साल कार्तिक पूर्णिमा व गुरु नानक जयंती पर लगाया जाता है यह जगाधरी से लगभग 17 किमी दूर है यहां पर संत व श्रद्धालू तीन सरोवर पर बारी बारी से स्नान करते है कृपाल मोचन, ऋण मोचन व सूरज कुंडहरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

ऐसा माना जाता है कि 1679 ईसवी में गुरु गोबिंद सिंह यहां आकर रुके थे और करीब 52 दिन तक इसी स्थान पर रुके थे और पूजा करतर थे द्रोपदी व पांच पांडवो ने भी इस मंदिर का दौरा किया था यह कपाल मोचन के नाम से भी प्रसिद्ध है पुराणों में कपालमोचन सरोवर का प्राचीन नाम सोमसर एवं औशनस तीर्थ था। जिसका उल्लेख महाभारत और वामन पुराण में मौजूद है।

फतेहाबाद जिले के मेले

ढिंगसरा का मेला

यह मेला फतेहाबाद से 10 किलोमीटर दूर ढिंगसरा गांव में लगाया जाता है और इस मेले में हिसार, फतेहाबाद, सिरसा जिले के लाखों श्रद्धालु आते है इसे मानसागर का मेला भी कहा जाता है हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

प्रिय पाठकों,आशा करता हु कि हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1 जिले अनुसार पढ़कर आप संतुष्ट होंगे अगर फिर भी हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग -1 में कोई मेला रह जाता है तो  हमारे साथ कॉमेंट बॉक्स मे सांझा कर सकते हैहरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-1

हरियाणा के प्रसिद्ध मेले भाग-2 

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Kajla

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