शिक्षा मनोविज्ञान का अध्ययन व विधियां ( Study and Methods of Educational Psychology)

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प्रिय पाठकों, आज हम आपके लिए लेकर आये है HTET/CTET से सम्बंधित शिक्षा मनोविज्ञान का अध्ययन व विधियां ( Study and Methods of Educational Psychology)के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी, इसमे 4 से 5 प्रश्न आपके HETT/CTET व TET से सम्बंधित एग्जाम में पूछे जाते है तो आइए पढ़ते है मनोविज्ञान का अध्ययन व विधियां के बारे मेें विस्तारपूर्वक जानकारी

शिक्षा मनोविज्ञान का अध्ययन व विधियां ( Study and Methods of Educational Psychology)

दोस्तो, शिक्षा मनोविज्ञान का अध्ययन करने के लिए सबसे पहले मनोविज्ञान के बारे में जानना पड़ेगा कि मनोविज्ञान क्या होता और कितने प्रकार का होता है तो आइए पढ़ते है

मनोविज्ञान

मनोविज्ञान को इंग्लिश भाषा मे हम Psychology कहते है यह दो शब्दों से मिलकर बना है psycho + logos, psycho का अर्थ होता है आत्मा और logos का अर्थ होता है अध्ययन । आत्मा का अध्ययन करना ही मनोविज्ञान कहलाता है दूसरे शब्दों में हम कह सकते है मनोविज्ञान को आत्मा सम्बन्धी बातचीत माना जाता है

Psychology का सबसे पहले जिक्र ग्रीक मनोवैज्ञानिक रुडोल्फ गोइकिल ने 1547-1628 ने किया था उन्होंने ने 1590 के आस पास अपनी पुस्तक साइक्लोलोजी लिखी थी लेकिन अरस्तू ने इस शब्द का अध्ययन सबसे पहले अपनी पुस्तक Di Amina में किया था इसीलिए इसे मनोविज्ञान का जनक कहा जाता है

मनोविज्ञान शब्द की उत्पति

शब्द उत्पति भाषा अर्थ
साइकोलॉजी साइको + लॉगस लेटिन आत्मा का विज्ञान
एजुकेशन एडुकेयर लेटिन उठाना, शिक्षित करना
शिक्षा शिक्ष धातु संस्कृत
एंडोलेंस एडो लिशियरे लेटिन वृद्धि
पर्सनैलिटी पर्सोना लेटिन नाटक या मुखोटा
हैबिट हैबिटस लेटिन किसी चीज को प्राप्त करना
इंटेरेस्ट (रुचि) Interess लेटिन किसी चीज को अपनी इच्छा अनुसार करना
मोटिवेशन (अभिप्रेरणा) मोटम लेटिन टू मूव और मोशन

मनोविज्ञान के विकास की अवस्थाएं

मनोविज्ञान के विकास के क्रम को 4 भागो में विभाजित किया जाता है

  • आत्मा का विज्ञान
  • मन व मस्तिष्क का विज्ञान
  • चेतना व चेतन अनुभूति का विज्ञान
  • व्यवहार का विज्ञान

आत्मा का विज्ञान

ईसा पूर्व से 16 वी शताब्दी तक मनोविज्ञान को आत्मा का ज्ञान के रूप मे परिभाषित किया, ग्रीक व यूनानी दर्शन शास्त्रों ने मनोविज्ञान की परिभाषा आत्मा  के रूप मे की थी, प्राचीन समय मे यह आत्मा का दर्शन के नाम से जाना जाता था

समर्थक: प्लेटों, अरस्तू, डेकर्ते

मन व मस्तिष्क का ज्ञान

16 वी शताब्दी से 17 वी शताब्दी तक मनोविज्ञान को मन का विज्ञान कहा जाने लगा, इटली के वैज्ञानिक पोमपोनोजी ने इसे मस्तिक का अध्ययन करने वाला विज्ञान बताया था

समर्थक: जॉन लॉक, थॉमस रीड व पोमपोनोजी

चेतना व चेतन अनुभूति का विज्ञान

विलियम वुन्ट

17 वी से 19 वी शताब्दी तक मनोविज्ञान को चेतना का विज्ञान कहा जाने लगा

विलियम जेम्स व विलियम वुन्ट ने 1879 मे लिपजिंग मे मनोविज्ञान की प्रथम स्थापना की थी

उनके अनुसार मनोविज्ञान मनुष्य की चेतन क्रियाओ का अध्ययन करता है

वुन्ट को प्रयोगात्मक मनोविज्ञान का जनक भी कहा जाता है

समर्थक: विलियम जेम्स, विलियम वुन्ट, ई बी टिचनर व जेम्स सल्ली

व्यवहार का विज्ञान

20 वी शताब्दी के आरंभ से लेकर अब तक मनोविज्ञान को व्यवहार का विज्ञान बताया गया है

वाटसन: मनोविज्ञान व्यवहार का निश्चित विज्ञान है

वूडसवर्थ: सबसे पहले मनोविज्ञान ने अपनी आत्मा का परित्याग दिया इसेक बाद मन व चेतना को भी भूल दिया लेकिन इसका संबंध आज भी व्यवहार से बना हुआ है इसलिए यह वातावरण से संबंधित व्यक्ति की क्रियाओ का वैज्ञानिक अध्ययन है

विलियम मैकडुल: मनुष्य के व्ययहार का नियमन करने व अच्छी तरह समझने मे सहायता प्रदान करता है

समर्थक: वाटसन, स्किनर, थार्नडाइक, पैवलव

मनोविज्ञान की प्रमुख परिभाषाएं

क्रो एण्ड क्रो: मनोविज्ञान मनव व्यवहार व मनव संबंधों का अध्ययन है

बोरिंग लेगफिलेड: यह मानव प्रकृति का अध्ययन है

सिकनर: यह मनुष्य के जीवन की सभी प्रकार की प्रक्रियाओ जैसे: गतिविधिया, समायोजन, क्रियाए व अभिव्यक्तिया आदि प्रक्रियाओ व व्यवहार का अध्ययन करता है

जेम्स: मनोविज्ञान की सर्वोतम परिभाषा चेतना के वर्णन व व्याख्या के रूप मे की जा सकती है

वूडसवर्थ: सबसे पहले मनोविज्ञान ने अपनी आत्मा का परित्याग दिया इसेक बाद मन व चेतना को भी भूल दिया लेकिन इसका संबंध आज भी व्यवहार से बना हुआ है इसलिए यह वातावरण से संबंधित व्यक्ति की क्रियाओ का वैज्ञानिक अध्ययन है

वाटसन: मनोविज्ञान व्यवहार का घनात्मक विज्ञान है

मनोविज्ञान का क्षेत्र

मनोविज्ञान के संप्रदाय व उपागम

वर्ष 1862 मे विलियम वुन्ट ने ब्रिटरैज नामक पुस्तक मे मनोविज्ञान को स्वतंत्र विज्ञान होने का दावा किया था 20 वी शताब्दी के आरंभ मे सभी वैज्ञानिकों ने मनोविज्ञान को व्यवहार के रूप मे अध्ययन करना शुरू कर दिया था जिसे निम्न भागों मे विभाजित किया गया है

सरंचनावाद

विलियम वुन्ट ने सरंचनावाद के विकास की प्रष्ठ भूमि को तैयार किया था उन्होंने मनोविज्ञान की विषयवस्तु व चेतना अनुभूति को माना है चेतना मे सवेदना, प्रत्यक्ष ज्ञान , कल्पना यदि सम्मिलित है

इस संप्रदाय का सबसे बड़ा योगदान मनोविज्ञान अध्ययन मे वैज्ञानिक पद्धति पर बल देना है

सरंचनावाद को ऑपचारिक रूप टिचनर ने दिया था

प्रकार्यवाद

इक्से मुख्य समर्थक विलियम जेम्स, जॉन डीवी, जेम्स एंजिल माने जाते है प्रकार्यवाद के अनुसार मानसिक क्रियाए गतिशील होती है जिसमे सम्पूर्ण व्यक्ति के अध्ययन पर जोर दिया जाता है

यह पाठ्यक्रम की विषय वस्तु पर अधिक बल देता है

बाल मनोविज्ञान, बुद्धि परीक्षण व व्यक्तिगत भिन्न आदि उपगमों को प्रस्तुत करने का श्रेय इसी संप्रदाय को दिया जाता है

सहचर्यवाद

इसकी स्थापना जॉन लॉक ने की थी इसके अंतर्गत स्पंदन व स्मृति को ज्ञात किया जाता है इसके मुख्य समर्थक जॉन स्टुअर्ट, जेम्स मिल, हर्बर्ट स्पेन्सर आदि है इसे मुख्य दो भागों मे विभाजित किया जाता है

  • पुराण साहचर्यवाद
  • आधुनिक साहचर्यवाद

व्यवहारवाद

इसका श्रेय जॉन ब्राडस वाटसन को दिया जाता है इसका मुख्य उद्देशय मनव व्यवहार की व्यायाखा करना, नियंत्रण करना व उसमे संबंध मे भविष्यवाणी करना है वर्तमान मे मनोविज्ञान को व्यवहार का विज्ञान माना गया है

गैस्टालटवाद

इस संप्रदाय का जन्म जर्मनी मे 1912 मे किया गया था इसके मुख्य समर्थक वड़ाईमर, कोफ्फा, वुल्फ़ जी कोहलर आदि है

गैस्टालटवाद शब्द का अर्थ है की रूप, आकृति, सरंचना, इसके अनुसार ही मनुष्य के व्यवहार व अनुभव का अध्ययन किया जाता है

प्रयोजनवाद

इसका प्रतिपादक विलियम मैकडुल है इस संप्रदाय के अनुसार सभी कार्यों के पीछे कोई न कोई उद्देश्य जरूर हॉट है इसिलिय यह प्रेरणा, कार्य करने की इच्छा पर बल देता है

इसे कारणीयता भी कहा जाता है

मनोविश्लेषणात्मक

इस संप्रदाय के प्रतिपादक सिगमन फ्रायड माने जाते है इन्होंने यौन कारक पर जोर दिया है इसे अनुसार ही बच्चे मे पितृ विरोधी भावना व मातृ विरोधी भावना ग्रन्थि का निर्माण होता है इसकी स्थापना नैदानिक परिसर मे हुई थी

शिक्षा

शिक्षा शब्द संस्कृत के शिक्ष धातु से लिया गया है जिसका अर्थ होता है सीखना या ज्ञान प्राप्त करना है यह एक निरंतर व गतिशील प्रक्रिया है शिक्षा के द्वारा ही मनुष्य अपनी विचार शक्ति, तर्कशील, बौद्धिक, घनात्मक, भावुकता व शारीरिक क्षमता आदि मूल्यों को विकसित करता है शिक्षा का अर्थ चार दृष्टिकोण के आधार वर व्यक्त किया गया है

पहले दृष्टिकोण के आधार पर

शिक्षा शब्द लेटिन भाषा के Educare से निकला है जिसका अर्थ है पालन पोषण ( To bring Up or to Noursih)

दूसरे दृष्टिकोण के आधार पर

इस दृष्टिकोण के अनुसार यह लेटिन भाषा के Educere से  निकला है जिसका अर्थ होता है विकसित करना अथवा निकलना ( To lead out or down out)

तीसरे दृष्टिकोण के आधार पर

इस दृष्टिकोण के अनुसार यह लेटिन भाषा के Educatum से  निकला है जिसका अर्थ होता है पढ़ने व सीखने की प्रक्रिया (The art of Teaching and Learning)

चौथे दृष्टिकोण के आधार पर

इस दृष्टिकोण के अनुसार यह लेटिन भाषा के Educo से  निकला है जिसमे E का अर्थ होता है:- अदंर से ( With in) और Duco  का अर्हत होता है बाहर को (Out), इस प्रकार इसका अर्थ होता है बच्चे की अंतर्निहित शक्तियों का विकास करना

शिक्षा मनोविज्ञान, मनोविज्ञान की एक स्वतंत्र शाखा है  जिसके अंतर्गत मनुष्य की व्यक्तिगत क्रियाओ के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है मनोविज्ञान के सिद्धांतों का शिक्षण प्रक्रिया में इस्तेमाल करना और शैक्षिक समस्याओं के समाधान में प्रयोग करना शिक्षा मनोविज्ञान के दायरे को परिभाषित करता है।

शिक्षा मनोविज्ञान की प्रमुख परिभाषाएं

विवेकानंद: मनुष्य की अंतर्निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति ही शिक्षा है

गांधी: बालक व मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा मे निहित सर्वोतम शक्तियों के सर्वागीण प्रकटीकरण को ही शिक्षा कहते है

पेसटालॉजी: शिक्षा मनुष्य की समस्त शक्तियों का स्वाभाविक, प्रगतिशील व विरोधिहीन विकास है

अरस्तू: स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निर्माण करने का कार्य शिक्षा करती हैं

स्पेंसर: शिक्षा में आदतें, स्मरण, आदर्श, स्वरूप, शारीरिक तथा मानसिक कौशल, बौद्धिकता और रुचि नैतिक विचार और ज्ञान ही नहीं विधियां भी सम्मिलित हैं

जॉन डीवी: शिक्षा व्यक्ति की उम्र योग्यताओं के विकास का नाम है जो उसे उसके वातावरण पर नियंत्रण रखना सिखाती है और उसकी संभावनाओं को पूर्ण करती है

टी. पी.नन: शिक्षा व्यक्ति का ऐसा पूर्ण विकास है जिसके द्वारा व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता से मानव जीवन के लिये अपनी मौलिक भूमिका प्रदान करते है

फ्रोबेल: शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा बालक की शक्तियां बाहर प्रकट होती है

रवीन्द्रनाथ टैगोर:  इच्छा का अर्थ है मस्तिष्क को इस योग्य बनाना है कि वह चिरंतन सत्य को पहचान सके, इसके साथ एकरूप हो सके और उसे अभिव्यक्त कर सके

क्रो एण्ड क्रो: शिक्षा मनोविज्ञान व्यक्ति के जन्म से वृद्धावस्था तक सीखने के अनुभवों का वर्णन और व्याख्या करता है

कॉलसनिक: मनोविज्ञान के सिद्धांतों का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में करना शिक्षा मनोविज्ञान कहलाता है

स्कीनर: शैक्षणिक परिस्थितियों में मानव व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन शिक्षा मनोविज्ञान कहलाता है

स्टीफन: शिक्षा मनोविज्ञान शैक्षिक विकास का क्रमिक अध्ययन है

शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति

शिक्षा मनोविज्ञान की प्रकृति वैज्ञानिक होती है इसमे वैज्ञानिक विधियों, नियमों तथा सिद्धांतों के माध्यम से अध्ययन किया जाता है।

यह  विधायक और नियामक दोनों प्रकार का विज्ञान है। विधायक विज्ञान तथ्यों पर, जबकि नियामक विज्ञान मुल्यांकन  पर आधारित होता है।

शिक्षा का स्वरूप संश्लेषणात्मक है, जबकि शिक्षा मनोविज्ञान का स्वरूप विश्लेषणात्मक है।

शिक्षा मनोविज्ञान व्यवहार का विज्ञान है इसके अंतर्गत बालक के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।

शैक्षणिक परिस्थितियों के अंतर्गत बालक के व्यवहार का अध्ययन करना ही शिक्षा मनोविज्ञान की विषय वस्तु (theme) है।

शिक्षा मनोविज्ञान का सीधा संबंध शिक्षण में अधिगम क्रियाकलापों से है।

शिक्षामनोविज्ञान को सर्वप्रथम आधार प्रदान करने का श्रेय पेस्टोलॉजी द्वारा किया गया।

शिक्षा तथा मनोविज्ञान को जोड़ने वाली प्रमुख कड़ी मानव मानव व्यवहार है

शिक्षा मनोविज्ञान का क्षेत्र

शिक्षार्थी

  • व्यक्तिगत भिन्नता व उनका मापन
  • मनुष्य की जन्मजात संबंधी योग्यताए
  • चेतन, अचेतन व अर्ध चेतन व्यवहार
  • आंतरिक व बाहरी व्यवहार
  • बुद्धि व विकास

सीखने की प्रक्रिया

  • सीखने के  इयं व सिद्धांत
  • स्मृति व विस्मृति
  • प्रत्यक्षीकरण
  • समस्या समाधान
  • प्रशिक्षण स्थानान्तारण

सीखने संबंधित वातावरण

  • कक्षा का वातावरण
  • मूल्यांकन विधि
  • निर्देशन व परामर्श

अध्यापक परामर्श

शिक्षा मनोविज्ञान के कार्य

  • विधार्थी को जानना
  • शैक्षिक निर्देशन एवं परामर्श
  • पाठ्यक्रम निर्माण का अध्ययन
  • अध्ययन विधियां से मापन
  • सीखने की कला
  • समूह मनोविज्ञान
  • मापन और मूल्यांकन
  • अभिवृद्धि एवं विकास
  •  मानसिक स्वास्थ्य एवं समायोजन
  • स्वयं अपने आपको समझना

शिक्षा मनोविज्ञान की विधियां

शिक्षा मनोविज्ञान को समझने के वैज्ञानिक विधियों का उपयोग लिया जाता है इसकी 2 विधियां है आत्मगत विधि व वस्तुगत विधियां

आत्मगत विधि

इसमे व्यक्ति अपनी मानसिक क्रियाओ का अध्ययन कर्ता है स्किनर इसे वैज्ञानिक रूप दिया है यह 2 प्रकार की विधियों मे बाँटा जाता है

  1. अंतरदर्शन विधि: यह प्राचीन विधि है इसे आत्म निरीक्षण विधि भी कहा जाता है इसका अर्थ होता है स्वयं अपने अंदर झांकना। यह मनोविज्ञन की मौलिक विधि है
  2. अन्तरानुभाव की संचय विधि: इसमे मनुष्य अपने पूर्व अनुभव को स्मरण करते है

वस्तुगत विधि

इस विधि को निम्न भागों मे विभाजित किया जाता है जिसका वर्णन नीचे दर्शाया गया है

अवलोकन विधि

जे बी वाटसन निरीक्षण विधि के प्रवर्तक माने जाते है इसे प्रेक्षण/बहिदर्दशन/ निरीक्षण विधि के नाम से जाना जाता है इसमे मनुष्य के व्यवहार व बाह्य जीवन पर अध्ययन किया जाता है

प्रश्नावली विधि

इस विधि मे विचार विमर्श करने जानकारी प्राप्त करना, प्रशनोतरी के माध्यम से अध्ययन करना, इसे साक्षात्कार विधि भी कहते है

व्यक्ति इतिहास विधि

इसमे मनुष्य के जीवन वृत का लेख जोखा पर अध्ययन किया जाता है इसलिए इसे व्यक्ति वृत- अध्ययन विधि भी कहा जाता है यह विधि असमान्य व्यक्ति पर प्रयुक्त की जाती है जिनमे कुछ न कुछ विकृतियाँ पाई जाती है

प्रयोगात्मक विधि

जर्मन वैज्ञानिक विलियम जेम्स व वुन्ट ने 1879 मे लिपजिंग मे मनोविज्ञान की प्रथम स्थापना की थी और इस विधि को लोकप्रिय बनाया था इस विधि का मुख्य उद्देश्य चरों, घटनाओ  के मध्य संबंधों का पता लगाया जाता है ये 3 प्रकार के होते है

  • स्वतंत्र चर
  • आश्रित चर
  • मध्यवर्ती चर

विकसात्मक विधि

इस विधि के अंतर्गत स्वयं व्यक्ति के विकास का अध्ययन किया जाता है इसे उत्पतिमूलक विधि भी कहा जाता है इसके अंतर्गत गर्भवस्था से लेकर मृत्युपर्यंत तक मनुष्य के मानसिक व व्यवहारिक परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है

संखिकी विधि

यह मनोविज्ञान मे प्रयोग होने वाली नवीनतम विधि है किंग के अनुसार इसमे सामूहिक रूप से प्राकृतिक व समजक घटनाओ का अध्ययन कर्णव अनुमान लगाया आदि का प्रयोग किया जाता है

नैदानिक विधि

यह विधि चिकित्सा शास्त्र मे प्रयोग की गई थी इसमे व्यक्तियों के रोगात्मक लक्षणों की पहचान करना व उसके कारणों का पता लगाया जाता है

  • बच्चे का हकलाना
  • अपराधी बालक
  • बच्चों के पढ़ने मे कठिनाई
  • उत्तेजित बालक

समाजमिति विधि

इसक विधि का प्रतिपादक मोरेन ने किया था सामूहिक समहू के रूप मे इस विधि का अध्ययन करना और प्रत्येक व्यक्ति वृत के रूप मे दर्शाया गए है जिसे सोशयोग्राफ कहते है

मनोविश्लेषण विधि

इस विधि के जन्मदाता सिगमंड फ्रायड है इसका विकास एडलर व जंग ने किया था, इस विधि के द्वारा मानसिक ग्रंथियों का पता लगाया जा सकता है फ्रायड के अनुसार 3 अवस्थाएं होती है

चेतनवस्था: यम मन का 1/10 भाग होती है

अचेतनवस्था: यह मन का 9/10 भाग होती है

अर्धचेतनवस्था: यह दोनों विधि बीच का भाग होती है इसी विधि से स्वपन विश्लेषण व सम्मोहन की सहायता ली जाती है

 

शिक्षा मनोविज्ञान का अध्ययन व विधियां

देखे बालव्यवस्था व बाल विकास का परिचय

बाल विकास एक नजर मे ( Child Development at a Glance)
बाल विकास एक नजर मे

प्रिय दोस्तों, हम उमीद करते है की हमारे द्वारा लिखा गया यह लेख शिक्षा मनोविज्ञान का अध्ययन व विधियां ( Study and Methods of Educational Psychology) आपको जरूर अच्छा लगा होगा, शिक्षा मनोविज्ञान से संबंधित प्रश्न उत्तर हम अगले अध्याय मे पढ़ेंगे, इससे संबंधित कोई प्रतिक्रिया या सुझाव देना चाहता है तो कमेन्ट बॉक्स के माध्यम से दे सकते है

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Neelam Chaudhary

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